श्रीकामकलाकाली KAALI



श्रीकामकलाकाली!! 

   ॐ अस्य श्रीकामकलाकाली मन्त्रस्य महाकाल ऋषि: वृहतिछन्दः कामकला काली देवता, क्लीं बीजम्, हूं शक्ति:, भगवति कामकलाकाली प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः! 

षडङ्ग न्यास ::
क्लीं का हृदयाय नमः । 
क्रीं म शिरसे स्वाहा । 
हूँ क  शिखायै वौषट् । 
क्रों ला नेत्रत्रयायै वौषट् । 
स्फ्रें का कवचाय हुं । 
कामकलाकाली ली अस्त्राय फट्।

             !!ध्यानम्!! 
ध्यानमस्याः प्रवक्ष्यामि कुरु चित्तैकतानताम्
उद्यद्घनाघना श्लिष्यज्जवा-कुसुम सन्निभाम्

मत्त-कोकिल-नेत्राभां  पक्व-जम्बूफल-प्रभाम्
सुदीर्घ-प्रपदालम्बि विस्रस्त-घन-मूर्ध्वजाम्

ज्वालदंगार-वच्छोण नेत्रत्रितय-भूषिताम्
उद्य-च्छारद-सम्पूर्ण चन्द्र-कोकनदाननाम्

दीर्घ-दंष्ट्रा-युगो  दंचद्-विकराल-मुखाम्बुजाम्
वितस्तिमात्र-निष्क्रान्त  ललज्जिह्वा-भयानकाम्

व्यात्ताननतया दृश्यद्वात्रिंशद्दन्तमण्डलाम्
निरन्तरं वेपमानोत्तमांगाम् घोररूपिणीम्

अंसासक्त नृमुंडसृक् पिबन्तीं वक्रकन्धराम्

उरोजा भोगसंसक्त सम्पतद्रुधिरोच्चयाम्
सशीत्कृतिध्यन्तीम् तल्ले लिहानरसज्ञया। 

बीजमन्त्रम्-त्रैलोक्याकर्षण मन्त्रम्:-
     क्लीं क्रीं हूँ क्रों स्फ्रें कामकलाकाली स्फ्रें क्रों हूँ क्रीं क्लीं स्वाहा। 

कामकलाकाली गायत्री:-ॐ अनङ्गाकुलायै विद्महे मदनातुरायै धीमहि तन्नः कामकलाकाली प्रचोदयत्। 

(कपिलोपासित उपासित) कामकलाकाली मन्त्रम् ::
       ॐ अस्य मन्त्रस्य, श्रीसनक ऋषि:, प्रतिष्ठा छन्द:, श्रीकामकलाकाली देवताः,ग्लूं शक्तिः,ग्लूं कीलकं श्रीकामकलाकाली प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।

ह्रीं फ्रें क्रौं ग्लूं छ्रीं स्त्रीं हूं स्फ्रें खफ्रें ह्सख्फ्रें  क्ष्रौं स्हौ: फट् स्वाहा। 

(मरीचि उपासित) श्रीकामकलाकाली मन्त्रम्:-
     ॐ अस्य मन्त्रस्य, श्री कदर्म  ऋषि:, बृहति छन्द:, श्रीकामकलाकाली देवताः, ह्रीं शक्तिः, हूं कीलकं श्रीकामकलाकाली प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्रीं हूं छ्रीं स्त्रीं फ्रें क्रों हौं क्षौं आं स्फ्रें स्वाहा। 


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